एम्बुलेंस का हॉर्न बज रहा था | खिड़की से देखा तो पड़ोस वालो के यहाँ एम्बुलेंस आयी थी | में जल्दी से चप्पल पहनकर बहार गयी तो देखा की अंकल को एम्बुलेंस में ले जा रहे हैं | मै आंटी के पास गयी वो काफी परेशान थी | तबियत तो उनकी भी सही न थी , घुटने ख़राब और डायबिटीज भी बढ़ी हुई थी | दोनों अकेले ही रहते थे |बेटी की तो अंकल ने शादी कर दी थी दो साल पहले और बेटा पुणे में नौकरी कर रहा था | आंटी ने उन्हें फ़ोन कर दिया था | बेटी पहुंचने ही वाली थी | आंटी को संभालना मुश्किल ही हो रहा था कि तभी उनकी बेटी आ गयी , बड़ी परेशां थी | बेटी अपनी माँ को उम्मीद दे रही थी की सब सही हो जाएगा , बेटी समझा ही रही थी की तभी आंटी की भी हालत ख़राब होने लगी | सुबह तक वो भी हॉस्पिटल में एडमिट हो गयी | उनका बेटा भी आ गया था | तभी एक दिन शाम को पता चलता हे की दोनो नहीं रहे | मेने कारण पुछा तो पता चला कि उन्हें कोरोना हो गया था |बेटा तो अपने माँ बाप से मिल भी न पाया और बेटी तो सिर्फ माँ को ही देख पायी थी | बताते हैं की इस बीमारी में किसी को भी मिलने नहीं दिया जाता और अगर कोई म...
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